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Wednesday, September 20, 2023

जीवन एक संघर्ष

गिद्ध की प्रजाति का एक पक्षी है, नाम भूल रहा हूं। वह अंडे देने के लिए किसी ऊंचे पर्वत की चोटी पर चला जाता है। जोड़ा वहीं अंडे देता है, मादा अंडों को सेती है और एक दिन अंडा तोड़ कर बच्चे बाहर निकलते हैं। उसके कुछ दिन बाद जब बच्चे घोंसले से निकलना शुरू करते हैं तो नीचे गिर पड़ते हैं। कुछ दिनों के ये बच्चे जब  हजारों फीट की ऊंचाई से गिरते हैं, तब नर-मादा इस समय सिवाय चुपचाप देखते रहने के और कुछ नहीं कर सकते, वे बस देखते रहते हैं।
बच्चे पत्थरों से टकराते हुए गिरते हैं। कुछ ऊपर ही टकरा कर मर जाते हैं, कुछ नीचे गिर कर मर जाते हैं। उन्हीं में से कुछ होते हैं जो एकदो बार टकराने के बाद पंखों पर जोर लगाते हैं और नीचे पहुंचने के पहले पंख फडफड़ा कर स्वयं को रोक लेते हैं। बस वे ही बच जाते हैं। बचने वालों की संख्या दस में से अधिकतम दो ही होती है।
अब आप उस पक्षी के जीवन का संघर्ष देखिये! जन्म लेने के बाद उनके दस में से आठ बच्चे उनके सामने दुर्घटना का शिकार हो कर मर जाते हैं, पर उनकी प्रजाति बीस प्रतिशत जीवन दर के बावजूद करोड़ों वर्षों से जी रही है। संघर्ष इसको कहते हैं।
एक और मजेदार उदाहरण है। जंगल का राजा कहे जाने वाला शेर शिकार के लिए किए गए अपने 75% आक्रमणों में असफल हो जाता है। मतलब वह 100 में से 75 बार फेल होता है। अब आप इससे अपने जीवन की तुलना कीजिए, क्या हम 75% फेल्योर झेल पाते हैं? नहीं... इतनी असफलता तो मनुष्य को अवसाद में धकेल देती है। पर शेर अवसाद में नहीं जाता है। वह 25% माक्र्स के साथ ही जंगल का राजा है।
अब इसी घटना को दूसरे एंगल से देखिये! शेर अपने 75% आक्रमणों में असफल हो जाता है... इसका सीधा सा अर्थ है कि हिरण 75% हमलों में खुद को बचा ले जाते हैं। जंगल का सबसे मासूम पशु हिरण शेर जैसे बर्बर और प्रबल शत्रु को बार-बार पराजित करता है और तभी लाखों वर्षों से जी रहा है। उसका शत्रु केवल शेर ही नहीं है, बल्कि बाघ, चीता, तेंदुआ आदि हिंसक पशुओं के अलावा मनुष्य भी उसका शत्रु है और सब उसे मारना ही चाहते हैं। फिर भी वह बना हुआ है... कैसे?
वह जी रहा है, क्योंकि वह जीना चाहता है। हिरणों का झुंड रोज ही अपने सामने अपने कुछ साथियों को मार दिए जाते देखते हैं, पर हार नहीं मानते। वे दुख भरी कविताएं नहीं लिखते, हिरणवाद का रोना नहीं रोते। वे अवसाद में नहीं जाते, पर लडऩा नहीं छोड़ते। उन्हें पूरे जीवन में एक क्षण के लिए भी मनुष्य की तरह चादर तान कर सोने का सौभाग्य नहीं मिलता, बल्कि वे हर क्षण मृत्यु से संघर्ष करते हैं। यह संघर्ष ही उनकी रक्षा कर रहा है।
जंगल में स्वतंत्र जी रहे हर पशु का जीवन आज के मनुष्य से हजार गुना कठिन और संघर्षपूर्ण है। मनुष्य के सामने बस अधिक पैसा कमाने का संघर्ष है, परन्तु अन्य जीव-जन्तु जीवित रहने का संघर्ष करते हैं। फिर भी वे मस्त जी रहे होते हैं और हममें से अधिकांश अपनी स्थिति से असंतुष्ट हो कर रो रहे हैं।
अच्छी खासी स्थिति में जी रहा व्यक्ति अपने शानदार कमरे में बैठ कर एक-दूसरे से जलन व द्वेष का भाव रखता है। हम समझते हैं कि यही संघर्ष है। वे समझ ही नहीं पाते कि यह संघर्ष नहीं, अवसाद है। मनुष्य को अभी पशुओं से बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता है।

-GKnews Team

Sunday, January 1, 2023

संकल्पों को दोहराओ... लेकिन पूरा करने के लिए

लो एक और साल शुरू हो गया... हम फिर से अपने संकल्प दोहराएंगे। और गुजरते वक्त के साथ उन संकल्पों को छोड़ देंगे या इतनी ढील दे देंगे कि वे अपने आप ही हमें छोडऩे की कगार पर पहुंच जाएंगे। आखिर जब संकल्प ले ही लिया है तो फिर पूरा क्यों नहीं करते.... क्यों फंस जाते हैं इस दुनियावी जाल में। जब तय किया है कि फलां एग्जाम को फतेह करना है तो उस एग्जाम की तारीख चाहे एक महीने बाद हो या एक साल बाद... उसे क्रैक करने करने के लिए जुटने में संकोच या ढिलाई क्यों????
पढऩे के अनेक बहाने जुटाएंगे, लेकिन उन संसाधनों तक पहुंचने के लिए थोड़ा भी प्रयास नहीं करते जो हमें हमारे संकल्प तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होते हैं। क्या बहाना लगाते हैं... टाइम नहीं मिला, किताब नहीं मिली, आज सर्दी ज्यादा है, आज गर्मी जोरों पर है... या फिर 'मूड' नहीं है....
छोड़ो ये सब... आखिर जिन माता-पिता ने हमें पढ़ाने के लिए इतना कुछ किया है... अब जब वे इस उम्मीद में हैं कि हम हमारे लक्ष्य को क्रैक करेंगे और उनके सपनों को पूरा करेंगे तो हम बहाना मार रहे हैं। वो भी ऐसा जिसे सुनकर सामने वाला मन में हंसता होगा।
चलो उठो मेरे प्यारे दोस्त... कुछ करते हैं... ऐसा जो हम आज संकल्प ले रहे हैं, उसे पूरा करने में सहायक हो। तय करो कि जो भी वक्त मिले, जो भी संसाधन मिले उसका उपयोग अपने लक्ष्य को पूरा करने में लगा देंगे।
किताबों की धूल झाड़ लो... अनावश्यक एप्स को अपने मोबाइल से हटा लो। जो लक्ष्य की ओर से ले जाए.... तुम्हारे संकल्प को पूरा करे, अपने कमरे में... अपने मोबाइल में वही रखो। ऐसा नहीं है कि तुम्हें समय नहीं मिलता... बस में, ट्रेन में सफर करते-करते क्यों गेम खेलने लगते हो... इसकी बजाय ऑनलाइन स्टडी के इतने टूल हैं, किसी का भी उपयोग करो... कमरे में पड़े-पड़े छत को निहारने या टीवी का रिमोट दबाना बंद कर दो... सीधे किताब उठाओ और पढ़ो।
जो भी वक्त मिला है... जैसी भी परिस्थिति है... रुकना मत। नहीं तो पिछले साल की तरह इस बार भी वक्त निकल जाएगा और 2024...2025...2026... ऐसे ही निकलते जाएंगे। आखिर में वह साल भी आएगा, जब फॉर्म भरते हुए 'तुम्हारी उम्र निकल गई' जैसा वाक्य सुनने को मिलेगा।
तो मेरे दोस्त संकल्पों को दोहराओ... लेकिन पूरा करने के लिए।

-GKnews Team

Saturday, June 11, 2022

बस लगे रहिये... पढ़ते रहिये...

कहते हैं कि IAS/PCS बनने के लिए रोज 18 घंटे पढऩा जरुरी है, तब जाकर कोई IAS/PCS बनता है।
चलो 18 घंटे न सही.... अपने आप से पूछिए कि क्या आप 8 घंटे रोज अपनी पढ़ाई के लिए निकाल सकते हैं?
जो लोग job या business में व्यस्त नहीं उनके लिए 8 घंटे रोज अपने लक्ष्य को समर्पित करना मुश्किल नहीं है। आपके पास 24 घंटे होते हैं एक दिन में.... इन 24 घंटों को 8+8+8 में विभाजित कर लीजिए। 8 घंटा सोना भी जरुरी है। उसके बाद बचे 16 घंटे.... 8 घंटे आप अगर अपनी पढ़ाई को देते हैं तो बाकी के रोज मर्रा के क्रिया-कलाप जैसे नहाना-धोना, खाना-पीना, टीवी देखना समाचार-मनोरंजन watsapp, facebook और कोई काम जैसे घर में सहयोग इत्यादि के लिए आपके पास 8 घंटे बचे जो पर्याप्त हैं।
तो अब आप खुद check कीजिये कि आपका समय कहाँ जाता है, सबसे अच्छा उपाय है कि डायरी रखें जिसमें अपने 24 घंटे का हिसाब रखा जाए। 8 घंटे सोने के निकाल दीजिए, बाकी 16 घंटों का एक-एक मिनट का हिसाब होना चाहिए..... हर घंटे का लिखते जाइये कि कहाँ व्यतीत हुआ। सोते वक्त उसको देखिए कि कितना समय व्यर्थ हुआ, अगले दिन आपको खुद याद रहेगा कि क्या करना है और क्या नहीं.... कौन सा कार्य आपको आपकी मंजिल के समीप ले जा रहा है और कौन सा दूर.....?
इस अभ्यास में थोड़ा धैर्य रखना पड़ेगा, धीर-धीरे आपको डायरी में नोट करने की आदत हो जायेगी और आप अपना समय बर्बाद होने से बचाने में सफल होने लगेंगे।
और यदि आप पढ़ाई के 8 घंटे को बढ़ाकर 12 घंटे तक पहुंचाने में सफल होते हैं तो आपको अंतिम रूप से परीक्षा में सफल होने से कोई नही रोक सकता। बशर्ते की 12 घंटा पढ़ाई मतलब सिर्फ  पढ़ाई....
नींद के साथ समझौता न करें।
अगर आप ऐसा कर सकते हैं तो आपकी जीत निश्चित है।

बस लगे रहिये... पढ़ते रहिये... सफलता की राह पर आगे बढ़ते रहिये...

Sunday, July 25, 2021

कैसे करें आईएएस की तैयारी

आईएएस की परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों के मन में अनेक प्रश्न उठते रहते हैं, इन्हीं में से कुछ प्रश्नों के उत्तर बता रहे हैं विकास सिंह


प्रश्न- आईएएस में कितनी परीक्षाएं होती हैं?
उतर- इस परीक्षा में तीन चरण होते हैं। प्रारंभिक परीक्षा में दो पेपर होते हैं- एक GS और एक CSAT। प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात् मुख्य परीक्षा होती है जिसमें 9 पेपर होते हैं। इसमें 2 पेपर भाषा के, 4 पेपर सामान्य अध्ययन के, 2 पेपर एक वैकल्पिक विषय के और 1 पेपर निबंध का होता है। मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात् इंटरव्यू या साक्षात्कार के लिए बुलाया जाता है।

प्रश्न- तैयारी की शुरुआत कब करें?
उत्तर- सिविल सेवा की तैयारी आप ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष में शुरू कर सकते हैं। अगर किसी कारण से विलम्ब हो गया है तो कोई बात नहीं। आप कभी भी तैयारी शुरू कर सकते हैं, बस आप दृढ़ संकल्पित और अपना सर्वोत्तम देने के लिए तत्पर हों।

प्रश्न- किस माध्यम का चुनाव करें?
उत्तर- माध्यम वही चुने जिसमें आप अपना सर्वोत्तम दे सकें। लोगों की दकियानुसी बातों पर न जाएं। हर वर्ष हिंदी माध्यम के भी अभ्यर्थी सफल होते हैं। अत: हिंदी में लेखन शैली को लगातार बेहतर बनाने का प्रयास करें।

प्रश्न- क्या आईएएस और आईपीएस के लिए अलग अलग परीक्षाएं होती हैं?
उत्तर- नहीं। संघ लोक सेवा आयोग वर्ष में एक बार कॉमन परीक्षा आयोजित करता है जिसमें सफलता के बाद प्राप्त रैंकों के आधार पर आपको IAS, IPS, IFS और IRS जैसी सेवाओं में भेजा जाता है।

प्रश्न- क्या कोचिंग लेना अनिवार्य है?
उत्तर- बिल्कुल नहीं। माना कोचिंग आपका काम आसान करती है लेकिन किसी भी शास्त्र में यह नहीं लिखा कि बिना कोचिंग के अभ्यर्थी सफल नहीं होते। हर वर्ष का रिजल्ट बताता है कि 100+ अभ्यर्थी बिना कोचिंग के सफल हो रहे हैं।

प्रश्न- तैयारी के लिए कितना समय पर्याप्त है?
उत्तर - अगर आप अभी शुरुआत करना चाहते हैं तो आपकी तैयारी के लिए 18 माह पर्याप्त होंगे। शुरुआत के 3 माह में NCERT को ठीक से तैयार कर लीजिये। इसके बाद 12 माह आपकी विषयानुसार तैयारी के लिए। और अंतिम 3 माह मॉक टेस्ट और रिवीजन के लिए रखिये।

प्रश्न- ऑप्शनल पेपर का चुनाव कैसे करें?
उत्तर- बहुत से छात्रों की यह दुविधा होती है कि वैकल्पिक पेपर कौन सा चुने? हमारी उनको विशेष सलाह है कि वैकल्पिक पेपर के चुनाव के समय आप सिर्फ अपनी रुचि का ध्यान रखिये। किसी की सलाह का नहीं। अक्सर छात्र सफल अभ्यर्थियों के इंटरव्यू पढ़कर उनके विषय को ही अपना वैकल्पिक बना लेते हैं। यह घातक हो सकता है क्योंकि जरुरी नहीं कि जिस विषय में वे सुलभ हो उसे आप भी उसी तरह अपना पाएं। सबकी अपनी अलग-अलग रुचि होती है, किसी को भूगोल बड़ी आसान लगती है और बहुत से ऐसे भी हैं जिन्हें भूगोल से बड़ा डर लगता है। हर ऑप्शनल पेपर से अभ्यर्थी सफल हुए हैं। और हम खुद यह बिल्कुल नहीं मानते कि कोई विषय कम-ज्यादा स्कोरिंग होता है। यह आपकी लेखन शैली पर निर्भर करता है कि आप कितनी हद तक निरीक्षक को प्रभावित कर पाते हैं।

विकास सिंह की फेसबुक वॉल से साभार

Sunday, June 27, 2021

हर आईएएस टॉपर में होते हैं ये सामान्य गुण

-अंजलि देशमुख

आईएएस टॉपर्स को हमारे समाज में आदर्श माना जाता है क्योंकि उन्होंने देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में सफलता पाई है। आईएएस टॉपर दूसरे क्षेत्र के टॉपर्स की तरह ही पहले एक अच्छा छात्र बनता है और फिर एक टॉपर बन पाता है। इन व्यक्तियों के गुणों का विश्लेषण करना महत्वपूर्ण है।
अंजलि देशमुख ने इस लेख के माध्यम से उन 8 अद्वितीय गुणों पर प्रकाश डाला है, जो आईएएस टॉपर्स में आम हैं।

1. अनुशासन और इच्छा शक्ति

सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण अनुशासन जो कि लंबी अवधि में सफलता प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम गुण है। किसी भी अन्य निष्ठावान छात्र जैसे आईएएस टॉपर्स अपने अध्ययन के दौरान समय और ऊर्जा के महत्व को समझते हैं इसलिए वे अपने अध्ययन समय सारणी तथा अन्य दैनिक क्रिया में वक्त बिताने के बारे में बेहद अनुशासित होते हैं। अनुशासन का यह अर्थ है कि इच्छा शक्ति से जीवन के हर मोड़ में सफलता प्राप्त होगी और यह अनुशासन की शुरुआत एक उचित अध्ययन टाइम-टेबल को बनाए रखने से ही संभव हो सकता है। इच्छा-शक्ति की ही आवश्यकता केवल लंबे समय तक अभ्यास करने के लिए ही नहीं होती है बल्कि जब उम्मीदवार जीवन में हताश हो तो यही इच्छा-शक्ति अभ्यास को फिर से शुरू करने की एक नई ऊर्जा प्रदान करता है।

2. समर्पण और संगतता

आईएएस टॉपर और असफल आईएएस उम्मीदवार के बीच बुनियादी अंतर समर्पण और निरंतरता का है जो अभ्यास के साथ आता है। नई चीजें सीखने के लिए समर्पित होने और सीखने के तरीके में लगातार सुधार लाने के लिए एक कला की आवश्यकता है जो आईएएस उम्मीदवारों द्वारा अध्ययन के लिए एक सख्त टाइम-टेबल के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है। आईएएस में टॉप करने वाले छात्रों में अध्ययन की नियमितता में स्थिरता के महत्व का एहसास होता है और हर दिन संशोधन करने के लिए समय अवश्य निकालते हैं।

3. कभी हार ना मानने का रवैया:

आईएएस टॉपरों के पास कभी हार ना मानने का रवैया होता है जो उन्हें आईएएस परीक्षा की पूरी प्रक्रिया में प्रेरित करता रहता है। जब किसी व्यक्ति में कभी-कभी हार ना मानने का रवैया नहीं होता है तब वह आसानी से हार मान लेता है और ऐसी परिस्थिति आईएएस परीक्षा की तैयारी के दौरान बहुत घातक सिद्ध हो सकता है। आईएएस उम्मीदवारों को इस तरह के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रूप से ढल जाना चाहिए क्योंकि सिविल सर्विस सभी के लिए जीवन परिवर्तक हैं और इससे उन्हें आईएएस परीक्षा से जुड़े जोखिमों का एहसास करने में मदद मिलेगी।

4. चिंतनशील सोच

सिविल सर्विस के लिए अध्ययन की प्रक्रिया के दौरान आईएएस टॉपरों की एक चिंतनशील सोच विकसित होती है जो उन्हें समस्या की स्थिति में आगे बढऩे की कल्पना करने में मदद करती है। विश्लेषणात्मक तर्क का कौशल भी आईएएस परीक्षा देने के दौरान कुछ अलग सोचने में मदद करता है। ऐसी दूरदर्शी सोच अन्य उम्मीदवारों से आईएएस टॉपरों के उत्तर को अलग करती है क्योंकि इसमें छात्रों के बहुमत की तुलना में एक अनूठा समाधान होता हैं।

5. आत्मविश्वास और आत्म-सौष्ठव

जैसा कि गांधीजी ने कहा है कि 'ज्ञान ही शक्ति है', अगर हर छात्र सीखता रहता है तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। आईएएस टॉपरों के पास एक मजबूत विश्वास प्रणाली है जो उनके आईएएस की तैयारी में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए निरंतर प्रेरणा शक्ति की तरह काम करती है। सभी आईएएस उम्मीदवारों को भी अपने आईएएस सिलेबस को समय में पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए ताकि संशोधन के लिए उनके पास पर्याप्त समय शेष हो।

6. स्पष्ट लक्ष्य और संगठनात्मक कौशल

आईएएस टॉपर्स हमेशा जीवन के रास्ते में एक परिप्रेक्ष्य रखते हैं। वे जानते हैं कि मन में स्पष्टता आईएएस परीक्षा लिखने के दौरान बहुत महत्वपूर्ण है जो परीक्षा की प्रक्रिया में स्पष्टता को दर्शाता है। लक्ष्य, चाहे अल्पावधि या दीर्घकालिक, स्पष्ट होना चाहिए क्योंकि योजनाबद्ध लक्ष्य आईएएस टॉपरों को उनकी योग्यता के अनुसार अपनी पढ़ाई आयोजित करने में सहायता करता हैं। अध्ययन सामग्री को व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जा सकता है और अगर आईएएस उम्मीदवारों ने आईएएस परीक्षा में परिप्रेक्ष्य प्राप्त किया हो तो सफलता प्राप्त की जा सकती है।

7. काम के लिए सम्मान

'कार्य पूजा है' यह वाक्य वास्तव में एक आईएएस टॉपर पर लागू होता है। वह हमेशा यह महसूस करता है कि कार्य शब्द परिस्थितियों के लिए व्यक्ति-परक हैं जैसे जब वे आईएएस उम्मीदवार हैं, उनका काम अध्ययन करना है और जब वे आईएएस अधिकारी बन जाते हैं, तो उनका काम एक अच्छा प्रशासक बनना होता है। इसी तरह वह अपने काम का सम्मान करते है; वे ईमानदारी से समय-समय पर आने वाली समस्याओं को हल करने में प्राप्त ज्ञान को लागू करने की कोशिश करते हैं।

8. आत्म निरीक्षण

आईएएस टॉपरों को एहसास है कि कोई भी जीवन में परिपूर्ण नहीं हो सकता है और हर किसी की आईएएस तैयारी में सुधार के लिए जगह है ताकि वे अपने शिक्षण का समीक्षात्मक विश्लेषण करके अपनी रणनीति में सुधार कर सकें। आईएएस टॉपरों को पता है कि परीक्षा में किस तरह की जरूरत है आत्मनिरीक्षण सिर्फ एक नैतिक अभ्यास नहीं है; यह जीने के प्रत्येक चरण में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सकता है (एक छात्र के रूप में भी)।

अंजलि देशमुख की फेसबुक वॉल से साभार

Tuesday, May 25, 2021

आईएएस बनने के लिए ये स्टेप जरूर अपनाएं

शुभम कुमार यश

पढ़ाई में जिनका मन न लगे जरूर पढ़ें


आप कहां गलती कर जाते हैं, इस लाइन में देखें और सही करें, अगर आप इन 10 लाइन को फॉलो कर लेते हैं तो यकीन कीजिए आप 80 प्रतिशत यहीं सफल हो गए। कोई परीक्षा कितनी टफ है, यह जानने के लिए उसके सक्सेस रेशो को देखना चाहिए। इस मापदंड से सिविल सर्विसेज एग्जाम या आईएएस एग्जाम को सबसे कठिन परीक्षा कहा जा सकता है। इसका सक्सेस रेशो 0.01 प्रतिशत है! ऐसी परीक्षा में सफलता पाने के लिए केवल प्रतिबद्धता, तैयारी और किस्मत ही काफी नहीं होती। इसके लिए जरूरी हो जाता है कि उम्मीदवार आईएएस की तैयारी को अपनी जीवनशैली ही बना डाले। पहले-पहल यह बहुत बोझिल लग सकता है लेकिन यदि आप आईएएस परीक्षा को क्लियर करने को लेकर समर्पित और गंभीर हैं, तो इसकी तैयारी का इससे बेहतर कोई तरीका नहीं है। आईएएस की तैयारी को अपनी जीवनशैली में शामिल करने के लिए जरूरी है कि आप इन दस आदतों को अपना लें..

1. टाइमटेबल बनाएं

अगर आप आईएएस परीक्षा में सफलता पाना चाहते हैं, तो आपको यह बताने की जरूरत नहीं कि पढ़ाई के लिए टाइमटेबल बनाना कितना जरूरी है। आपका टाइमटेबल ऐसा हो, जो पढ़ाई के घंटों, आराम, फिजिकल एक्टिविटी और सोशल लाइफ सभी के बीच संतुलन बनाकर चले। सारा समय सिर्फ पढ़ाई करते रहने से एकरसता आ जाएगी और पढ़ाई में आपका मन ही नहीं लगेगा। इसके साथ ही, आप दो-तीन अलग-अलग टाइम शेड्यूल बना लें, जिनमें आपकी पढ़ाई के दैनिक, साप्तााहिक और मासिक लक्ष्य निर्धारित हों। इससे आप अपनी तैयारी की निगरानी कर पाएंगे और जहां जरूरी हो, वहां सुधार ला पाएंगे।

2. कॉन्सेप्ट क्लियर रखें

आईएएस परीक्षा का सिलेबस बहुत वृहद है और किसी विषय की पूरी लंबाई-चौड़ाई नाप डालता है। ऐसे में कई उम्मीदवार तथ्यों को रट लेते हैं, बजाय उनका कॉन्सेप्ट समझने के। यह तरीका बिल्कुल गलत है। हमारी याददाश्त केवल एक सीमित डेटा ही स्टोर कर सकती है और यह भी समय के साथ धूमिल पड़ती जाती है। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि आप जो भी पढ़ें, उसकी मूल अवधारणा को गहराई से समझें। अगर आप किसी टॉपिक को अच्छी तरह समझ लेंगे, तो उससे जुड़ी तमाम जानकारी अच्छी तरह याद भी रख पाएंगे।

3. राइटिंग स्किल विकसित करें

कई आईएएस उम्मीदवार केवल प्रिलिमिनरी एग्जाम पर ही फोकस करते हैं, जो कि ऑब्जेक्टिव टाइप परीक्षा है। शुरू-शुरू में यह रणनीति सही लग सकती है लेकिन आगे चलकर आपको अहसास होगा कि यह गलत है। आईएएस की मेन परीक्षा परंपरागत सब्जेक्टिव टाइप परीक्षा है, जिसमें आपको हाथ से उत्तर लिखने होंगे। इसलिए अगर आप मेन परीक्षा में भी सफल होना चाहते हैं, तो बेहतर होगा कि आप प्रिलिम्स स्तर से ही अपनी राइटिंग स्किल में निखार लाना शुरू कर दें। कई जानकारों का मत है कि लिखकर पढ़ाई करना न सिर्फ तथ्यात्मक सूचनाओं को याद रखने के सबसे अच्छे तरीकों में से एक है, बल्कि यह उत्तरों का फॉर्मेट विकसित करने में भी मददगार है, जो कि मेन परीक्षा में लाभ देता है।

4. अखबारों से दोस्ती

अखबार किसी आईएएस उम्मीदवार के सबसे अच्छे दोस्त होते हैं। आपको रोज अखबार पढऩे की आदत डालनी ही चाहिए। मगर इतना ही काफी नहीं है। आपको उन टॉपिक्स की पहचान भी होनी चाहिए, जिन पर आपको ज्यादा फोकस करना है। अखबार पढऩा शुरू करने से पहले खुद से पूछें कि आपको क्या पढऩा चाहिए, क्यों पढऩा चाहिए और कहां पढऩा चाहिए। इस प्रकार आप वही पढ़ेंगे, जो पढऩा जरूरी है और रोज-ब-रोज आवश्यक सूचनाएं इकट्ठी करते चलेंगे।

5. सरकारी वेबसाइट्स पर नजर

अधिकांश आईएएस उम्मीदवारों का इस बात पर ध्यान ही नहीं जाता कि सरकारी वेबसाइट्स नीतियों, योजनाओं, कार्यक्रमों, डेटा और रिपोर्टों का सरल, सुगम स्रोत हैं। इन वेबसाइट्स का अध्ययन कर आप जो सूचनाएं पाएंगे और जो समझ विकसित करेंगे, वह प्रिलिम्स और मेन्स दोनों में लाभदायक रहेगी।

6. क्वालिटी डिस्कशन

किसी आईएएस उम्मीदवार को अपने साथी उम्मीदवारों और टीचर्स व कोचिंग इंस्ट्रक्टर्स के साथ स्वस्थ और उच्च कोटि के डिस्कशन करते रहना चाहिए। इन चर्चाओं में किसी एक टॉपिक पर फोकस करें, उसे अलग-अलग नजरियों से देखें और अपनी बात को प्रामाणिक डेटा के आधार पर आगे बढ़ाएं। किसी टॉपिक पर अलग-अलग नजरिये सामने आने पर आप परीक्षा में अधिक संतुलित और परिपूर्ण उत्तर दे पाएंगे। ऐसे किसी डिस्कशन ग्रुप का सदस्य बनने से पढ़ाई के लिए प्रेरणा भी मिलती रहती है। साथ ही इससे इंटरव्यू की तैयारी में भी मदद मिलती है।

7. प्रॉब्लम सॉल्विंग एटिट्यूड

परीक्षा में सफल होने के लिए ही नहीं, आईएएस अधिकारी के रूप में काम करने के दौरान भी आपको प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल की दरकार होगी। आपके सामने कई चुनौतियां आएंगी, जिनसे आपको नई-नई तकनीकों से निपटना होगा। आपको वृहद सिलेबस को पढऩे, टाइम मैनेजमेंट, संसाधनों, पियर प्रेशर, समाज के प्रेशर आदि की चुनौतियों से जूझना पड़ सकता है। ऐसी स्थितियों में आपका प्रॉब्लम सॉल्विंग एटिट्यूड ही काम आएगा।

8. अपने टीचर खुद बनें

आईएएस की तैयारी करना बहुत लंबा और थका देने वाला काम है। इसका सिलेबस मानो लगातार बढ़ता जाता है और समय लगातार कम होता जाता है। ऐसे में किसी एक टीचर, गाइड, मेंटर या किसी एक कोचिंग क्लास मटेरियल पर निर्भर रहने से बात नहीं बनने वाली। आपको खुद अपना टीचर बनना होगा। आप खुद ही प्रश्न तैयार करें और रेफरेंस तथा स्टडी मैटेरियल के इस्तेमाल से उनके उत्तर तलाशें। टीचर और स्टूडेंट दोनों की भूमिकाएं खुद निभाने से आपके भीतर आत्मविश्वास का भी संचार होगा, जो परीक्षा में और उसके बाद भी काम आएगा।

9. स्वस्थ जीवनशैली

'केवल काम, नहीं आराम' की नीति आईएएस की तैयारी में कारगर नहीं हो सकती। ढेर सारी किताबों के साथ खुद को कमरे में बंद करके आज तक कोई आईएएस परीक्षा क्लियर नहीं कर पाया है। आपको अपने स्वास्थ्य, मनोरंजन तथा सामाजिक जीवन पर भी ध्यान देना चाहिए। योग, ध्यान या फिर रनिंग, स्पोट्र्स आदि के लिए रोज समय जरूर निकालें। पौष्टिक भोजन और रोज कम से कम 8 घंटे की नींद लें। परिवार के साथ तो समय बिताएं ही, ऐसे दोस्त भी बनाएं जिनके लक्ष्य आपसे मिलते-जुलते हों। इससे आपका फोकस बना रहेगा और आपको प्रेरणा मिलती रहेगी।

10. प्रतिबद्धता और समर्पण

आईएएस परीक्षा में सफलता का सफर बहुत लंबा और मुश्किल है। आपकी प्रतिबद्धता ही इस सफर को पूरा करने में आपके काम आएगी। आपके सामने ऐसी कई चुनौतियां और समस्याएं आएंगीं, जिनसे आपके कदम डगमगा सकते हैं। कई ऐसे युवा भी हैं, जिन्होंने आईएएस की तैयारी में 5 से 7 साल लगा देने का बाद सामाजिक दबाव या फिर लगातार नाकामी के चलते हार मान ली। ऐसी तमाम चुनौतियों के बावजूद, यह भी सच है कि हर साल मुट्ठी भर उम्मीदवार अपनी इच्छाशक्ति के बल पर इस परीक्षा को क्रैक कर ही लेते हैं। इसके लिए जरूरी है कि आपको खुद पर विश्वास हो और अपने लक्ष्य के प्रति आप में समर्पण हो

शुभम कुमार यश की फेससबुक वॉल से साभार

Monday, March 29, 2021

यूपीएससी परीक्षा : उन सवालों के जवाब, जो अक्सर मन में आते हैं

सामान्य छात्रों के मन में आईएएस की परीक्षा को लेकर कई प्रश्न चलते रहते हैं। जैसे- माध्यम कौनसा अच्छा रहेगा, इसमें कितनी परीक्षाएं होती हैं आदि। कुछ ऐसे ही प्रश्नों का जवाब ढूंढने का प्रयास यहां किया गया है। आशा है, ये जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित होगी....





-शिखा सिंह

प्रश्न- आईएएस में कितनी परीक्षाएं होती हैं ?
उत्तर-
इस परीक्षा में तीन चरण होते हैं। प्रारंभिक परीक्षा में दो पेपर होते हैं, एक त्रस् और एक ष्टस््रञ्ज. प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात् मुख्य परीक्षा होती है जिसमें 9 पेपर होते हैं। इसमें 2 पेपर भाषा के, 4 पेपर सामान्य अध्ययन के, 2 पेपर वैकल्पिक विषय के और 1 पेपर निबंध का होता है। मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद इंटरव्यू या साक्षात्कार के लिए बुलाया जाता है।

प्रश्न- तैयारी की शुरुआत कब करें?
उत्तर-
सिविल सेवा की तैयारी आप ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष में शुरू कर सकते हैं। अगर किसी कारण से विलम्ब हो गया है तो कोई बात नहीं। आप कभी भी तैयारी शुरू कर सकते हैं। अपितु आप दृढ़संकल्पित और अपना सर्वोत्तम देने के लिए तत्पर हों।

प्रश्न- किस माध्यम का चुनाव करें?
उत्तर-
माध्यम वही चुने जिसमें आप अपना सर्वोत्तम दे सकें। लोगों की दकियानुसी बातों पर न जाएं। हर वर्ष हिंदी माध्यम के भी अभ्यर्थी सफल होते हैं। अत: हिंदी में लेखन शैली को लगातार बेहतर बनाने का प्रयास करें।

प्रश्न- क्या आईएएस और आईपीएस के लिए अलग-अलग परीक्षाएं होती हैं?
उत्तर-
नहीं। संघ लोक सेवा आयोग वर्ष में एक बार कॉमन परीक्षा आयोजित करता है जिसमें सफलता के बाद प्राप्त रैंक के आधार पर आपको आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, और आईआरएस जैसी सेवाओं में भेजा जाता है।

प्रश्न- क्या कोचिंग लेना अनिवार्य है?
उत्तर -
बिल्कुल नहीं। माना कोचिंग आपका काम आसान करती है लेकिन किसी भी शास्त्र में यह नहीं लिखा कि बिना कोचिंग के अभ्यर्थी सफल नहीं होते। हर वर्ष का रिजल्ट बताता है कि 100+ अभ्यर्थी बिना कोचिंग के सफल हो रहे हैं।

प्रश्न- तैयारी के लिए कितना समय पर्याप्त है?
उत्तर-
अगर आप अभी शुरुआत करना चाहते हैं तो आपकी तैयारी के लिए 18 माह पर्याप्त होंगे। शुरुआत के 3 माह में एनसीआरटी को ठीक से तैयार कर लीजिये। इसके बाद 12 माह आपकी विषयानुसार तैयारी के लिए और अंतिम 3 माह मॉक टेस्ट और रिवीजन के लिए रखिये।

प्रश्न- ऑप्शनल पेपर का चुनाव कैसे करें ?
उत्तर-
बहुत से छात्रों कि यह दुविधा होती है कि वैकल्पिक पेपर कौन सा चुनेें? हमारी उनको विशेष सलाह है कि वैकल्पिक पेपर के चुनाव के समय आप सिर्फ  अपनी रुचि का ध्यान रखिये। किसी की सलाह का नहीं। अक्सर छात्र सफल अभ्यर्थियों के इंटरव्यू पढ़कर उनके विषय को ही अपना वैकल्पिक बना लेते हैं। यह घातक हो सकता है क्योंकि जरूरी नहीं कि जिस विषय में वे सुलभ हो उसे आप भी उसी तरह अपना पाएं। सबकी अपनी अलग-अलग रुचि होती है किसी को भूगोल बड़ी आसान लगती है और बहुत से ऐसे भी हैं जिन्हें भूगोल से बड़ा डर लगता है। हर ऑप्शनल पेपर से अभ्यर्थी सफल हुए हैं। और हम खुद यह बिल्कुल नहीं मानते कि कोई विषय कम या ज्यादा स्कोरिंग होता है। यह आपकी लेखन शैली पर निर्भर करता है कि आप कितनी हद तक निरीक्षक को प्रभावित कर पाते हैं।

-शिखा सिंह की फेसबुक वॉल से साभार

Sunday, February 28, 2021

मिशन सिविल सेवा : सफलता के लिए इन गुणों को करें मजबूत

-शिखा सिंह



सिविल सेवक बनने के इच्छुक व्यक्ति में निम्नलिखित गुण होने चाहिएं-

धैर्य और दृढ़ता

यह परीक्षा आपके धैर्य की बहुत कठिन परीक्षा है। एक लाख में से चंद लोग ही इसे पहले प्रयास में पास करते हैं। इसे साल-दर-साल दोहराने के लिए तैयार रहें, तब तक, जब तक कि या तो आप पास नहीं हो जाते या फिर बैठने के लिए अयोग्य नहीं हो जाते। आपको ग्रटिफिकेशन डिले करने की क्षमता सीखनी होगी, जहां आपको अल्पकालिक खुशी को एक तरफ रखना होगा ताकि आप दीर्घकालिक लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर सकें। क्या आप यह कर सकते हैं?

मेहनत करने की क्षमता

लंबे समय तक एक साथ पढऩे की क्षमता। स्वयं अध्ययन के लिए खुद को मोटिवेट करने की क्षमता।

नई चीजें सीखने की क्षमता

यदि आपको एक नया विषय दिया जाता है, तो आप अपने साथियों की तुलना में इसे कितनी तेजी से सीख सकते हैं?

मानसिक स्पष्टता और योग्यता

अनंत सुझावों/सामग्री/पुस्तकों/टॉपर वार्ता से प्रभावित नहीं होने की क्षमता। आपके पास एक सिंगल पॉइंटेड रणनीति होनी चाहिए और उस रणनीति को लागू करने के लिए निर्ममता होनी चाहिए।

भावनात्मक स्थिरता

जब चीजें आपके रास्ते पर नहीं जातीं तो शांत और ठंडा रहने की क्षमता। मेरा विश्वास कीजिये कि ऐसे क्षण होंगे जब चीजें आपकी योजना के अनुसार नहीं होंगी। आप शेड्यूल के पीछे हो सकते हैं, मॉक्स में उम्मीदों के अनुसार नंबर नहीं आयेंगे, लिखित उत्तर में गुणवत्ता नहीं झलक रही। अनंत चीजें हैं जो गलत हो सकती हैं। मैं तो कह रही हूँ कुछ ना कुछ गलत हो ही जाएगा। क्या आप उन क्षणों में शांत, ठंडे और स्थिर बने रह सकते हैं?

सिविल सेवक बनने के लिए गहन आंतरिक प्रेरणा

यह सिर्फ एक आकर्षण नहीं होना चाहिए जो हमें आईएएस अधिकारियों और आईपीएस अधिकारियों को देखकर या टॉपरों की बातचीत को देखकर मिलता है। न तो यह आपका भागने का मार्ग होना चाहिए क्योंकि आप अपनी नौकरी पसंद नहीं करते हैं या इसलिए कि आप किसी अन्य नौकरी को पा रहे हैं इसलिए इधर आ रहे हैं। बाह्य प्रेरणा मुसीबत और निराशावाद के क्षण में दूर हो जाएगी। जो कुछ भी आपकी आंतरिक प्रेरणा है- पैसा, सम्मान, शक्ति, बदला, सेवा - सवाल यह है कि क्या आप 2-3 साल (या इससे भी अधिक) के लिए आंतरिक प्रेरणा को बनाए रख सकते हैं?
उन विषयों में गहरी रुचि जो यूपीएससी पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं। वैसे आपको कला और संस्कृति में रुचि रखने की आवश्यकता नहीं है (कोई भी व्यक्ति इसमें रूचि नहीं रखता), लेकिन इसके अलावा, यह वास्तव में आवश्यक है कि पाठ्यक्रम में वर्णित विषयों पर आपकी सक्रिय रुचि और जिज्ञासा हो।
स्वीकार करने की क्षमता, कि हम जो कर सकते हैं, उसे करने के बाद, जो हम पढ़ सकते हैं, उसे पढ़कर, फिर भी भाग्य धोखा दे सकता है। किस्मत बहुत बड़ा कारक है। आपको मानसिक रूप से तैयार होना चाहिए कि बुरी किस्मत के कारण कुछ भी गलत हो सकता है।

-शिखा सिंह की फेसबुक वॉल से साभार

Wednesday, February 17, 2021

परिवर्तन का नियम...

-शुभम कुमार 'यश'


  • जिंदगी में कभी-कभी ऐसा वक्त भी आता है। जब इंसान अंदर से टूट जाता है। अंदर से मर-सा जाता है। ऐसा लगता है, सारी परेशनियां मेरी जिंदगी में ही क्यूँ है। ऐसा लगता है, मुसीबतों ने चारों तरफ से घेर लिया हो। जैसे किसी चक्रव्यूह में फंस गए हों। हर चीज में फेल हो जाते हैं। रिलेशनशिप में, करियर में, हर चीज में हार जाते हैं। ऐसा लगता है जैसे हर बात उलटी हो रही है, हर चीज गलत हो रही है।
  • और मेरे साथ ही ऐसा क्यूं हो रहा है। ऐसे दु:खों में उलझ के रह जाते हैं, जैसे कोई रास्ता ही नहीं दिखाई देता। लगता है कोई अपना नहीं है यहाँ, जो मेरी प्रॉब्लम को सॉल्व कर सके। मेरे दु:ख को समझ सके, कई लोग तो इतने टूट जाते है अंदर से। उन्हें लगता है ऐसी जिंदगी से तो हम मर जाएं, अगर जिंदगी में इतने ही दु:ख है तो क्या फायदा ऐसे जीवन का।
  • एक बात आप हमेशा याद रखना, दु:ख चाहे कितना भी बड़ा क्यूं ना हो। पर हिम्मत दु:ख से हमेशा बड़ी होती है। जब भी आपकी जिंदगी में कोई दु:ख आए, कोई परेशानी आए, तो अपनी हिम्मत को इतना बड़ा कर दो कि आपका दु:ख उसके आगे छोटा पड़ जाए। हर इंसान को इस दौर से गुजरना ही होता है। ये परेशानियां, ये दु:ख इंसान को अंदर से बहुत मजबूत बना देती हैं।
  • जिंदगी में कभी आपके सामने कोई दरवाजा बंद हो जाए। तो समझ लेना कि अब कोई बड़ा दरवाजा खुलने वाला है। लाइफ का कोई चैप्टर बंद हो जाए। कोई कहानी खत्म हो जाए तो टूटने की जरूरत नही है।
  • ये आपकी जिंदगी का सिर्फ एक चैप्टर है। बस जरूरत है... एक पेज पलटने की। जैसे ही आप एक पेज पलटेंगे आपकी जिंदगी में नया चैप्टर शुरू हो जाएगा। जिसमें बहुत सारी नई बातें होंगी।
  • कभी हम रिश्तों में हार जाते हैं। कभी हम करियर में हार जाते हैं। कभी अपनो से हार जाते है। कभी तो जिंदगी से ही हार जाते हैं। जब कोई रिश्ता टूटता है या दिल टूटता है, लोग उस दर्द को सह नहीं पाते।
  • और जब कुछ वक्त गुजर जाता है तो लोग कहते हैं अच्छा हुआ वो रिश्ता मेरी जिंदगी से चला गया। अगर उस रिश्ते में हम रहते तो हमारी तो जिंदगी खराब हो जाती।
  • कई बार कुछ चीजें हमारी जिंदगी में ऐसी होती हैं, हमें लगता है कि हमारे साथ ऐसा क्यूं हो रहा है। आगे चलकर वो चीजें हमारे बेहतर भविष्य को लेकर आती हैं। आप जितने भी सफल लोगों की कहानियां सुनेंगे या पढ़ेंगे, वो यही कहते हैं- अगर जिंदगी में हमने दु:खों को नहीं देखा होता। चुनौतियों का सामना ना किया होता तो आज हम इस मुकाम पर नहीं होते।
  • आपको लगता है ये मुसीबत, परेशानी, दर्द, दु:ख मेरी जिंदगी में क्यूं आई है, वो इसलिए आई है कि आप अपने बेहतर भविष्य की तरफ देखें।
  • आप वहां से हट जाएं, अभी जिस जगह आप हैं। क्योंकि जिस जगह आप हैं, वो जगह आपके लिए सही नहीं है। जिस इंसान के साथ आज आप हैं, वो इंसान आपके लिए सही नहीं है।


-शुभम कुमार 'यश' की फेसबुक वॉल से साभार

Sunday, February 7, 2021

12वीं के बाद ऐसे करें यूपीएससी की तैयारी, मिलेगी सफलता


 

-मोहित डागर
सपने तो सभी देखते हैं, लेकिन उसे पूरा करने की कीमत हर कोई नहीं चुका सकता। सपने भी उन्हीं के पूरे होते हैं जो इसकी कीमत चुकाते हैं। ऐसा ही एक सपना है आईएएस बनने का। आईएएस बनने के लिए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन करता है। यूपीएससी हमारे देश की सबसे कठिन व प्रतिष्ठित परीक्षा है। हर साल लाखों युवा महज कुछ सीटों के लिए इस एग्जाम की तैयारी करते हैं। इस परीक्षा में सफलता का प्रतिशत बहुत ही कम है। इस परीक्षा में वही सफल होता है जिसमें शैक्षणिक योग्यता के साथ ही अनुशासन और धैर्य हो। अगर आप भी आईएएस बनने का सपना देखते हैं तो इसके लिए जरूरी है कि इसकी तैयारी स्नातक स्तर पर ही शुरू कर दें। सिविल सेवा में सफलता पाने के लिए एक सटीक रणनीति और व्यवस्था होना जरूरी है।
अगर आप भी आईएएस बनने का सपना देखते हैं तो ऐसे कर सकते हैं इसकी तैयारी-

1. रणनीति और अध्ययन सामग्री

सिविल सेवा परीक्षा के लिए सबसे पहले आपको अपनी 12वीं की पढ़ाई के बाद ही ये डिसीजन लें लेना चाहिए कि आपको सिविल सेवा में जाना है। सिविल सेवा की तैयारी के लिए कम से कम 2 से 3 वर्ष का समय लगता है। आप अपने ग्रेजुएशन के दिनों से ही इसकी तैयारी शुरू कर दें। इस परीक्षा की तैयारी की शुरुआत एनसीईआरटी की किताबों का अध्ययन करने से करें। इसके अलावा सिविल सेवा परीक्षा का पूरा सिलेबस अपने साथ रखें और उसके अनुसार ही तैयारी करे। अधिकतर कैंडिडेट अपनी ग्रेजुएशन के किसी एक विषय में से ही परीक्षा के मुख्य चरण के लिए विषय चुनते हैं। इससे आपको आसानी रहती है क्योंकि आप ग्रेजुएशन के साथ इस विषय को पूरे तीन साल पढ़ते हैं। इसके अलावा दूसरे चयनित वैकल्पिक विषयों के लिए आप स्टडी मटेरियल का चयन कर सकते हैं या फिर एक्सपर्ट की सलाह ले सकते हैं।

2. समसामयिक मुद्दों की ऐसे करें तैयारी

समसामयिक विषयों की तैयारी करने के लिए आप नियमित रूप से समाचार पत्रों का अध्ययन करें। जैसे द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस के अलावा बीबीसी और डीडी न्यूज का बुलेटिन जरूर देखे। पिछले साल के प्रारंभिक प्रश्न पत्रों में भी समसामयिक मुद्दों से संबंधित प्रश्नों का अच्छा अनुपात रहा है इसलिए ये जरूरी है कि समसामयिक मुद्दों की तैयारी करते रहना चाहिए। इसके अलावा आप समसामयिक मुद्दों के लिए किताबों का भी सहारा ले सकते है। इसके लिए आप चाहे तो एनसीईआरटी और एनआईओएस की किताबों को पढ़ सकते हैं, ये किताबें आनलाईन नि:शुल्क उपलब्ध है।

3. विषयों का चयन करते समय रखे इन बातों का ख्याल

सिविल सेवा परीक्षा में सबसे जरूरी होता है विषय का अध्ययन, इसलिए विषय का चयन करते समय इस बात ध्यान रखें कि आपको उस विषय में रुचि है या नहीं। वैसे तो कोई भी विषय अध्ययन के लिए असंभव नहीं है लेकिन फिर भी जिस विषय में आपकी रूचि है, उसी विषय का चयन करना आपके लिए फायदेमंद रहता है। सिविल सेवा परीक्षा का सिलेबस बहुत बड़ा होने के कारण पूरे साल भर अध्ययन करना पड़ता है। इसलिए योजना के अनुसार ही चलते हुए पूरे साल अध्ययन करना जरूरी है।

4. पढ़ाई के लिए जरूरी है एकाग्रता

सिविल सेवा परीक्षा निकालने के लिए ये जरूरी है कि आप अपने लक्ष्य के प्रति एकाग्र रहें। क्योंकि सिविल सेवा की परीक्षा कोई बैंकिग या एसएससी की परीक्षा नहीं है, जिसमें रट्टा मारने से सफलता मिल जाती है। इसलिए इस परीक्षा की तैयारी के लिए आपको त्याग तो करना ही पड़ेगा, इसके बिना आप इस परीक्षा में कुछ नहीं कर सकते। आपको दो से तीन साल सिविल सेवा के लिए देने ही पड़ेगे। इन सालों में हर दिन आपको नियमित अध्ययन करना पड़ेगा।

5. कितना पढऩा है जरूरी

सिविल सेवा परीक्षा के लिए वैसे तो एक साल पर्याप्त है, लेकिन लोगों को दो से तीन साल भी लग जाते हैं। ये अलग-अलग लोगों की क्षमता पर निर्भर करता है कि वे कितना अध्ययन कर सकते हैं। इसलिए हर दिन कम से कम 6 घंटे रोजाना पढ़ाई करना जरूरी है। कई बार ऐसा होता है कि आप तैयारी करते-करते डिमोटिवेट हो जाते हैं इसलिए मोटिवेशनल किताबों को पढ़ें। आपके आस-पास कैसे लोग रहते हैं, इसका आपकी जिंदगी पर काफी असर पड़ता है। अगर आपके आसपास नेगेटिव लोग रहते हैं तो ऐसे लोगों से जितना हो सके दूर रहने का प्रयास करें। ऐसे लोगों के साथ रहें जो आपको अच्छा फील करवाते हैं।

6. क्या दिल्ली जाना जरूरी है?

आपने भी लोगों से सुना होगा कि यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली जाकर कोचिंग करना जरूरी है। लेकिन आपको बता दें कि आप घर रहकर भी सिविल सेवा की तैयारी कर सकते हैं। बस आपको अपनी जिंदगी में थोड़ा सा बदलाव लाना पड़ेगा और आप घर पर रहकर भी उचित अध्ययन सामग्री से सिविल सेवा की परीक्षा पास कर सकते हैं। बाहर जाकर पढ़ाई करने के भी अपने ही टेंशन रहते हैं इसलिए अपने शहर में रहकर भी आप अध्ययन कर सकते हैं। आप चाहे तो कोई कोचिंग भी लगा सकते है।

7. पढ़ाई के साथ लेखन का अभ्यास भी है जरूरी

आपको पढऩे के साथ लिखने का भी अभ्यास करना है क्योंकि प्री एग्जाम निकालने के बाद मेंस की परीक्षा देनी पड़ती है जिसमें आपको लिखना पड़ता है। आप किसी भी टॉपिक पर संक्षेप में लगभग 200 शब्दों में लिखने का प्रयास करें। जितना आप लिखने की कोशिश करोगे उतनी ही आपकी लेखन शैली सुधरेगी और व्याकरण में कम गलती होगी।

-मोहित डागर की फेसबुक वॉल से साभार


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पेचीदा सवाल... क्या दसवीं के छात्र को यूपीएससी की तैयारी करनी चाहिए?

Monday, January 25, 2021

आत्मविश्वास बढ़ाने के 30 तरीके

शुभम कुमार 'यश'

दोस्तो इस पोस्ट में हम आत्मविश्वास बढ़ाने के 30 तरीकों या उपायों के बारे में बात करेंगे। पोस्ट को पूरा पढि़ए और अपनी लाइफ में अपनाइये व एक अच्छे आत्मविश्वासी व्यक्ति बनकर समाज में अपनी पहचान बनाइये।

 



01. स्वयं पर विश्वास रखें : सबसे पहले आपको खुद पर विश्वास रखना होगा कि मैं जैसा भी हूं, अच्छा हूं। क्योंकि आप जैसा सोचेंगे वैसा ही बनते जाएंगे।
02. लक्ष्य बनायें : कई लोगों के पास कोई लक्ष्य नहीं होने के कारण भी आत्मविश्वास की कमी होती है, इसलिए आपके पास एक स्मार्ट लक्ष्य होना चाहिये। जो आपको प्रेरित करता रहे।
03. खुश रहें।
04. सकारात्मक सोचें।
05. मत सोचिये कि लोग आपके बारे में क्या सोचेंगे।
06. सच बोलें व ईमानदार रहें।
07. वह कार्य करें जिसमें आपकी रूचि है।
08. अच्छे दिखिए व रहिये।
09. व्यवहार कुशल बनें।
10. वर्तमान में जियें।
11. योग व व्यायाम करें।
12. अपनी सफलताओं को याद करें।
13. चिंतामुक्त रहने की आदत बनायें।
14. आत्मनिर्भर बनें।
15. ऐसे कार्य न करें।
16. दृढ़ निश्चयी बनें
17. आंख से संपर्क।
18. मौखिक संचार कौशल :
19. शरीर की भाषा।
20. आगे रहो।
21. दूसरों की मदद करें।
22. एकाग्र चित्त रहें।
23. नया सीखते रहें।
24. जिम्मेदार बनें।
25. व्यक्तित्व का विकास करते रहें।
26. अपनों से बात करें।
27. समय के अनुसार बदलें।
28. ज्ञान को बढ़ायें।
29. गलतियों से सीखें।
30. अपने आप को दूसरों से कम न समझें।

-शुभम कुमार 'यश' की फेसबुक वॉल से साभार

Wednesday, January 6, 2021

इंटरव्यू में सफल होने के लिए कुछ टिप्स –

  • अपने कपड़ों का चुनाव सोच-समझ कर करें। कुछ सोबर पहनें, ऐसा जो मौके के हिसाब से उचित लगे।
  • साक्षात्कार कक्ष में पहुंचने के बाद सधी गति से चलें और अंदर पहुंचकर सबको ग्रीट करें। जब तक बैठने के लिए न कहा जाए न बैठें।
  • बात करते समय बोर्ड मेंबर्स से आई कांटैक्ट करें और किसी एक व्यक्ति की तरफ मुखातिब होकर बात न करें।
  • साक्षात्कार के पहले बोर्ड के बारे में ज्यादा पता न करें, किसी के विषय में पहले से धारणा बनाकर जाएंगे तो दिक्कत होगी।
  • यह ध्यान रखें कि अब आपके ज्ञान का नहीं बल्कि ज्ञान के इंप्लीमेंटेशन का परीक्षण हो रहा है. क्योंकि ज्ञान है तभी आप वहां तक पहुंचे हैं।
  • कोई भी जवाब देते समय दिमाग में यह रखें कि यह एक आईएएस ऑफिसर का जवाब है, किसी साधारण कैंडिडेट का नहीं।
  • कभी भी किसी पक्ष की तरफ अपना झुकाव न जाहिर होने दें, बैलेंस्ड बात करें।
  • कोई जवाब नहीं आता तो बिना घबराए सहजता से माफी मांग लें।
  • हिंदी या इंग्लिश जिस भाषा में सहज हों, उसी में उत्तर दें, वहां ज्ञान देखा जाता है, भाषा का माध्यम नहीं.
  • जो आप नहीं हैं, वह दिखाने की कोशिश न करें न ही बनावटी बनें। वहां बैठे लोग एक पल में आपका झूठ पकड़ लेंगे, उन्हें बहुत अनुभव होता है.
  • बात करते समय अपनी टोन का विशेष ध्यान रखें। बात सीधी, स्पष्ट और संयमित होनी चाहिए। बातचीत का वॉल्यूम बहुत हाई या लो न रखें।
  • पूरी बातचीत के दौरान विनम्र रहें पर आपके हिसाब से अगर कोई गलत बात कही जा रही है तो आराम से उस पर अपना मत जरूर रखें। हां में हां न मिलाए।
  • बोर्ड के लोग काफी सहयोग करते है, इसलिए साक्षात्कार को लेकर कोई भी डर या तनाव लेकर कक्ष में प्रवेश न करें, सहज रहे।

 

शुभम कुमार यश

Friday, January 1, 2021

पेचीदा सवाल... क्या दसवीं के छात्र को यूपीएससी की तैयारी करनी चाहिए?

मोहित डागर
आजकल जब कोई 10वीं क्लास का छात्र ये बोलता है कि 'मुझे भी आईएएस बनना है'' तो सुनकर बहुत ही अच्छा लगता है लेकिन सोचने वाली बात भी है कि इस छात्र को 'आईएएस क्या होता है' इसके बारे में कुछ भी जानकारी नहीं है ...या थोड़ी बहुत जानकारी है और थोड़ी जानकारी या बिल्कुल भी जानकारी नहीं होना एक घातक स्थिति होती है...

सपने देखना अच्छी बात है। लेकिन इतनी छोटी सी उम्र में और इतनी छोटी सी क्लास में सपने देखना और उसके लिए कार्य करना बिल्कुल भी तार्किक नहीं है...

अगर इस बात का और ऐसी मानसिकता का विश्लेषण किया जाए तो ये एक बहुत ही घातक कदम है क्योकि यूपीएससी के लिए तो उम्र 21 साल होनी चाहिए। जबकि 10वीं क्लास के छात्र की उम्र लगभग 15 साल होगी इसका मतलब इस छात्र को यूपीएससी की तैयारी लगभग 6 साल करनी होगी और एक ही चीज को बार-बार पढऩा पड़ेगा... शायद ही कोई ऐसा छात्र हो जो इस प्रक्रिया को इतने लंबे समय तक जारी रख सके।

दूसरी बात यह भी है... कि यूपीएससी की तैयारी के लिए ग्रैजुएशन आवश्यक है। अगर कोई 10वीं क्लास का छात्र है तो उसको ग्रेजुएशन करने में 5 साल लगेंगे और इन 5 वर्षों में एक ही सिलेबस को कई बार और लगातार पढऩा होगा...बल्कि ऐसा कर पाना बहुत ही कम संभव है।

ऐसा नहीं है कि इतनी जल्दी यूपीएससी की तैयारी करना एक घातक कदम ही है। ये एक अच्छा कदम भी है लेकिन इसकी अच्छाई सीमित है।

अगर कोई भी छात्र अपने आपको लगातार 5 या 6 साल एक ही सिलेबस से जोड़कर रखता है तो उसका भविष्य एक बहुत बड़ा सितारा बनकर चमकेगा ...इस बात की पर्याप्त संभावना बनती हैं लेकिन अपने आपको इतने लंबे समय तक रोक पाना बहुत ही मुश्किल प्रक्रिया है...

अगर इन दोनों पहलुओं को देखकर कोई निर्णय लिया जाए तो निर्णय यही ठीक रहेगा कि ऐसे छात्र को पहले अपनी अनिवार्य शिक्षा (लगभग ग्रैजुएशन के 2 साल तक की शिक्षा) पूरी करने के बाद ही यूपीएससी की तैयारी करनी चाहिए क्योंकि अब इस छात्र को यूपीएससी और अपनी क्षमता और योग्यता की पर्याप्त जानकारी हो जाएगी।

-मोहित डागर की फेसबुक वॉल से साभार

Wednesday, December 30, 2020

आसमानों की बातें

-शुभम कुमार 'यश'
1. जीवन में वो ही व्यक्ति असफल होते हैं, जो सोचते हैं पर करते नहीं ।
2. भगवान के भरोसे मत बैठिये, क्या पता भगवान आपके भरोसे बैठा हो।
3. सफलता का आधार है सकारात्मक सोच और निरंतर प्रयास!!!
4. अतीत के ग़ुलाम नहीं बल्कि भविष्य के निर्माता बनो।
5. मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचा दे।
6. कामयाब होने के लिए अकेले ही आगे बढऩा पड़ता है, लोग तो पीछे तब आते है जब हम कामयाब होने लगते है।
7. छोड़ दो किस्मत की लकीरों पे यकीन करना, जब लोग बदल सकते हैं तो किस्मत क्या चीज है।
8. यदि हार की कोई संभावना ना हो तो जीत का कोई अर्थ नहीं है।
9. समस्या का नहीं समाधान का हिस्सा बनें।
10. जिनको सपने देखना अच्छा लगता है उन्हें रात छोटी लगती है और जिनको सपने पूरा करना अच्छा लगता है उनको दिन छोटा लगता है।
11. आप अपना भविष्य नहीं बदल सकते पर आप अपनी आदतें बदल सकते हैं और निशचित रूप से आपकी आदतें आपका भविष्य बदल देंगी!
12. एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने के बाद दूसरा सपना देखने के हौसले को जिंदगी कहते हैं।
13. वो सपने सच नहीं होते जो सोते वक्त देखे जाते हैं, सपने वो सच होते हैं जिनके लिए आप सोना छोड़ देते है।
14. सफलता का चिराग परिश्रम से जलता है !!!
15. जिनके इरादे बुलंद हो वो सड़कों की नहीं आसमानों की बातें करते हैं।
16. सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं।
17. मैं तुरंत नहीं लेकिन निश्चित रूप से जीतूंगा।
18. सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगें लोग?
19. आशावादी हर आपत्तियों में भी अवसर देखता है और निराशावादी बहाने!!!
20. आप में शुरू करने की हिम्मत है तो, आप में सफल होने के लिए भी हिम्मत है।
21. सच्चाई वो दिया है जिसे अगर पहाड़ की चोटी पर भी रख दो तो बेशक रोशनी कम करे पर दिखाई बहुत दूर से भी देता है।
22. संघर्ष में आदमी अकेला होता है, सफलता में दुनिया उसके साथ होती है! जिस जिस पर ये जग हँसा है उसी उसी ने इतिहास रचा है।
23. खोये हुये हम खुद हैं और ढूढ़ते खुदा को हैं!!!
24. कामयाब लोग अपने फैसले से दुनिया बदल देते है और नाकामयाब लोग दुनिया के डर से अपने फैसले बदल लेते हैं।
25. भाग्य को और दूसरों को दोष क्यों देना जब सपने हमारे है तो कोशिशें भी हमारी होनी चाहिएं !!!
26. यदि मनुष्य सीखना चाहे तो उसकी प्रत्येक भूल उसे कुछ न कुछ सिखा देती है !!!
27. झूठी शान के परिंदे ही ज्यादा फडफड़़ाते हैं, तरक्की के बाज की उड़ान में कभी आवाज नहीं होती।
28. समस्या का सामना करें, भागे नहीं, तभी उसे सुलझा सकते हैं।
29. परिवर्तन से डरना और संघर्ष से कतराना मनुष्य की सबसे बड़ी कायरता है।
30. सुंदरता और सरलता की तलाश चाहे हम सारी दुनिया घूम के कर लें लेकिन अगर वो हमारे अंदर नहीं तो फिर सारी दुनिया में कहीं नहीं है।
31. ना किसी से ईष्र्या ना किसी से कोई होड़, मेरी अपनी मंजिलें मेरी अपनी दौड़।
32. ये सोच है हम इंसानों की कि एक अकेला क्या कर सकता है, पर देख जरा उस सूरज को वो अकेला ही तो चमकता है!!!
33. लगातार हो रही असफलताओं से निराश नहीं होना चाहिए क्योंकि कभी-कभी गुच्छे की आखिरी चाबी भी ताला खोल देती है।
34. जल्द मिलने वाली चीजें ज्यादा दिन तक नहीं चलती और जो चीजें ज्यादा दिन तक चलती हैं वो जल्दी नहीं मिलती है।
35. इंसान तब समझदार नहीं होता जब वो बड़ी-बड़ी बातें करने लगे, बल्कि समझदार तब होता है जब वो छोटी-छोटी बातें समझने लगे।
36. सेवा सभी की करना मगर आशा किसी से भी ना रखना, क्योंकि कोई भी सेवा का वास्तविक मूल्य नही दे सकता है।
37. मुश्किल वक्त का सबसे बड़ा सहारा है 'उम्मीद'! जो एक प्यारी सी मुस्कान दे कर कानों में धीरे से कहती है 'सब अच्छा होगा'!
38. दुनिया में कोई काम असंभव नहीं, बस हौसला और मेहनत की जरुरत है!!!
39. वक्त आपका है चाहे तो सोना बना लो और चाहे तो सोने में गुजार दो, दुनिया आपके उदाहरण से बदलेगी आपकी राय से नहीं।
40. बदलाव लाने के लिए स्वयं को बदलें।
41. सफल व्यक्ति लोगों को सफल होते देखना चाहते है, जबकि असफल व्यक्ति लोगों को असफल होते देखना चाहते हैं।
42. घड़ी सुधारने वाले मिल जाते है लेकिन समय खुद सुधारना पड़ता है!!!
43. दुनिया में सब चीज मिल जाती है केवल अपनी गलती नहीं मिलती।
44. क्रोध और आंधी दोनों बराबर हैं। शांत होने के बाद ही पता चलता है की कितना नुकसान हुआ।
45. चाँद पे निशान लगाओ, अगर आप चूके तो सितारों पे तो जरूर लगेगा!!!
46. गरीबी और समृद्धि दोनों विचार का परिणाम है।
47. पसंदीदा कार्य हमेशा सफलता, शांति और आनंद ही देता है।
48. जब हौसला बना ही लिया ऊँची उड़ान का तो कद नापना बेकार है आसमान का।
49. अपनी कल्पना को जीवन का मार्गदर्शक बनाए अपने अतीत को नहीं।
50. समय न लगाओ तय करने में, आपको क्या करना है, वरना समय तय कर लेगा कि आपका क्या करना है.
51. अगर तुम उस वक्त मुस्कुरा सकते हो जब तुम पूरी तरह टूट चुके हो तो यकीन कर लो कि दुनिया में तुम्हें कभी कोई तोड़ नहीं सकता!!!
52. कल्पना के बाद उस पर अमल जरूर करना चाहिए। सीढिय़ों को देखते रहना ही पर्याप्त नहीं है, उन पर चढऩा भी जरूरी है।
53. हमें जीवन में भले ही हार का सामना करना पड़ जाये पर जीवन से कभी नहीं हारना चाहिए।
54. सीढिय़ां उन्हें मुबारक हो जिन्हें छत तक जाना है, मेरी मंजिल तो आसमान है रास्ता मुझे खुद बनाना है!!!
55. हजारों मील के सफर की शुरुआत एक छोटे कदम से होती है।
56. मनुष्य वही श्रेष्ठ माना जाएगा जो कठिनाई में अपनी राह निकालता है।
57. पुरुषार्थ से असंभव कार्य भी संभव हो जाता है।
58. प्रतिबद्ध मन को कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है, पर अंत में उसे अपने परिश्रम का फल मिलेगा।
59. असंभव समझे जाने वाला कार्य संभव करके दिखाये, उसे ही प्रतिभा कहते हैं ।
60. आने वाले कल को सुधारने के लिए बीते हुए कल से शिक्षा लीजिए।
61. जो हमेशा कहे मेरे पास समय नहीं है, असल में वह व्यस्त नहीं बल्कि अस्त-व्यस्त है ।
62. कठिनाइयाँ मनुष्य के पुरुषार्थ को जगाने आती हैं।
63. क्रोध वह हवा है जो बुद्धि के दीप को बुझा देती है।
64. आपका भविष्य उससे बनता है जो आप आज करते हैं, उससे नहीं जो आप कल करेंगे।
65. बन सहारा बे सहारों के लिए, बन किनारा बे किनारों के लिए, जो जिये अपने लिए तो क्या जिये, जी सको तो जियो हजारों के लिए ।
66. चाहे हजार बार नाकामयाबी हो, कड़ी मेहनत और सकारात्मक सोच के साथ लगे रहोगे तो अवश्य सफलता तुम्हारी है।
67. खुद की तरक्की में इतना समय लगा दो, कि किसी और की बुराई का वक्त ही ना मिले!!!
68. प्रगति बदलाव के बिना असंभव है और जो अपनी सोच नहीं बदल सकते वो कुछ नहीं बदल सकते।
69. खुशी के लिए काम करोगे तो ख़ुशी नहीं मिलेगी, लेकिन खुश होकर काम करोगे, तो ख़ुशी और सफलता दोनों ही मिलेगी ।
70. पराजय तब नहीं होती जब आप गिर जाते हैं, पराजय तब होती है जब आप उठने से इनकार कर देते हैं।

शुभम कुमार 'यश' की फेसबुक वॉल से साभार

Wednesday, November 25, 2020

अपने लक्ष्य से भटको मत

अंजली 


 

सोशल मीडिया (फेसबुक, व्हाट्सएप) का उपयोग स्मार्ट बन कर कीजिए। मतलब सीधी सी बात है कि अपने लक्ष्य से भटको मत!!!
यहां भटकाव बहुत हैं...और जहां भटकाव होता है... वहां सफलता मिलना मुश्किल हो जाती है...!!!
यदि कोई आपके सपने को पूरा कर सकता है तो वह सिर्फ आप हैं....आप जानते हैं कि यह स्थिति हर छात्र की है... संघर्ष के दिनों में आपको संदेह की निगाह से देखा जाता है... आप इन सब तानों को अपने मन में समेट लें और इन्हें अपनी कमजोरी की बजाय अपनी ताकत बनाएं... और अधिक कठिन परिश्रम करें... क्योंकि परिश्रम का कोई विकल्प नहीं होता....आप कितनी भी मेहनत करें यह दुनिया आपको संदेह की निगाह से हमेशा देखेगी ही... परन्तु अपने मन को शांत रखना आपका कार्य है... अपना परिश्रम इतनी शांति से कीजिये कि जब आप सफल हों तो आपकी सफलता उन सभी लोगों को चुप करा दे...जो आपकी योग्यता पर प्रश्न उठा रहे थे...!!!
तुम्हारे कर्म से ही तुम्हारी पहचान होगी...और तुम्हारी पहचान से ही तुम्हारा अस्तित्व रहेगा...!!!
अब सोच लो...कर्म किस कदर हावी होकर करना हैं...क्योंकि दुनिया सिर्फ और सिर्फ सफलता देखती है... और सफलता से ही तुम्हारी एक अलग पहचान होती है...!!! मैं बस यही कहूँगी...तुम हवा हो...हवा आग लगा भी सकता हैं...और हवा आग बुझा भी सकता है...कहने का अर्थ यह है कि अगर कर्म सही दिशा में कर रहे हैं तो कोई माई का लाल आपको चयनित होने से नहीं रोक सकता। अंत में जीतता वही है जो मरने के लिए तैयार है।

-अंजली की फेसबुक वॉल से साभार

Friday, September 18, 2020

10 गलती की तो आईएएस नहीं बन सकते

 अगर आप भी कर रहे हैं मेहनत, तो आखिर तक जरूर पढ़ें...


-आलोक कुमार सिंह


1. बिना सोचे-विचार तैयारी शुरू करना

अगर आप सिर्फ दूसरों की नकल करके तैयारी की शुरुआत करेंगे तो आप आईएएस नहीं बन सकते हैं क्योंकि हर इंसान का आईक्यू अलग-अलग होता है।

2. तैयारी से पहले रणनीति नहीं बनाई

बिना विचारे जो करे वो पाछे पछताए। ये कहावत तो सुनी होगी आपने। अगर आप भी बिना विचारे तैयारी शुरू करेंगे तो आपको बाद में पछताना पड़ेगा। इसलिए पहले आईएएस परीक्षा का लेवल देख लें फिर अपनी क्षमता देखकर ही तैयारी शुरू करें।

3. प्रामाणिक किताबों को नहीं पढऩा

गाइड से आईएएस परीक्षा की तैयारी अगर आप करने की सोच रहे हैं तो तैयारी बिल्कुल भी ना करें। क्योंकि आईएसएस परीक्षा के सवाल किसी गाइड से नहीं आते हैं और ना ही वो किसी सेट पैटर्न पर आते हैं। इसलिए आपको अपने आप को इतना ग्रुम करना होगा कि आप गाइड के स्तर से ऊपर निकल सकें।

4. ग्रुप बनाकर नहीं पढ़ना

आईएएस बनने के बाद आपको टीम वर्क में काम करना होता है। इसलिए इस तैयारी के लिए जरुरी है कि आप टीम बनाकर पढ़ें। इससे कई फायदें होंगे। एक तो आपको सही मार्गदर्शन मिलता रहेगा और फालतू के निगेटिव विचारों से बचेंगे।

5. दूसरे के स्टडी प्लान को फॉलो करना

दुनिया में हर इंसान की प्रवृति अलग होती है। कोई नोट्स बनाकर पढ़ता है तो कोई किताब से ही पढ़ लेता है। इसलिए कभी-भी दूसरों का स्टडी प्लान कॉपी ना करें। इसमें फायदा कम और नुकसान ज्यादा है।

6. टाइम टेबल बनाकर पढ़ना

जिंदगी में हर काम एक निश्चित समय पर होता है। इसलिए आप भी अपनी पढ़ाई को कोशिश करके एक निश्चित टाइम फ्रेम में बांधने की कोशिश करें। इससे फायदा ये होगा कि आपका समय बचेगा।

7. जरूरत से ज्यादा नोट्स जुटाना

दूसरों के नोट्स उतना ही जुटाएं जितना पढ़ सकें। वैसे अपना नोट्स सबसे अच्छा होता है। अगर आप खुद के नोट्स बनाएंगे तो इससे बेहतर कुछ हो ही नहीं सकता।

8. दो से ज्यादा न्यूज पेपर पढ़ना

मोर स्टडी मोर कंफ्यूजन। ये कहावत तो आपने सुनी होगी। अगर आप दो से ज्यादा न्यूज पेपर पढ़ रहे हैं तो आप अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। कोशिश करें सिर्फ दो न्यूज पेपर पढ़ें। जिसमें से एक हिन्दी और एक अंग्रेजी हो।

9-असफल लोगों से सलाह लेना

असफल लोगों से बात जरुर करें लेकिन उनसे सलाह ना लें। बात करने से फायदा ये होगा कि आप ये जल्द समझ जाएंगे कि कहां पर गलती करने से ये लोग सफल नहीं हुए हैं। लेकिन अगर आप असफल लोगों से सलाह लेंगे तो आपको बहुत नुकसान होगा। क्योंकि असफल अपनी गलती कभी नहीं मानता तो सिर्फ दूसरों पर सारी तोहमत मढ़ देगा।

10. खुद पर भरोसा नहीं करना

आईएएस की तैयारी का पहला मंत्र हैं खुद पर तैयारी रखना। अगर आप खुद पर यकीन नहीं करते तो आप तैयारी की सोचिए भी नहीं। क्योंकि ये परीक्षा ही नेतृत्व क्षमता की तलाश के लिए ली जाती है। और जो इंसान खुद पर कांफिडेंस नहीं है वो दूसरों का नेतृत्व कभी नहीं कर सकता है।

-आलोक कुमार सिंह की फेसबुक वॉल से साभार

Monday, September 7, 2020

यूपीएससी इंटरव्यू : एटीट्यूट, कम्युनिकेशन एबिलिटी, लॉजिकल रीजनिंग चेक की जाती है

पूर्व चेयरमैन दीपक गुप्ता ने बताए यूपीएससी में इंटरव्यू के टिप्स

-मोहित डागर
यूपीएससी पास करके आईएएस और आईपीएस बनना इस देश के लाखों युवाओं का ख्वाब होता है। सालों से इस चुनौतिपूर्ण परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। वह कभी मेन्स में रह जाते हैं तो कभी इंटरव्यू में। आखिरी स्टेज इंटरव्यू में क्या प्रश्न पूछे जाएंगे, यह परीक्षा की तैयारी कर रहे हर शख्स के जेहन में उत्सुकता का विषय होता है। आखिरी उन 20 से 25 मिनट के दौरान किस तरह के सवाल पूछकर उम्मीदवार की पर्सनैलिटी का टेस्ट लिया जाता है? संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के पूर्व चेयरमैन और आईएएस अफसर (1974 बैच) रह चुके दीपक गुप्ता ने इंटरव्यू को लेकर कुछ टिप्स दिए हैं।
अपनी किताब 'द स्टील फ्रेम : ए हिस्ट्री ऑफ आईएएस' को लेकर दिए एक इंटरव्यू में यूपीएससी के पूर्व चेयरमैन दीपक गुप्ता ने कहा कि यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के सिलेबस में यह लिखा होता है कि इंटरव्यू का क्या उद्देश्य है। हर उम्मीदवार को इस पर जरूरी नजर डालनी चाहिए। उसमें लिखा होता है उम्मीदवार का एटीट्यूट, कम्युनिकेशन एबिलिटी, लॉजिकल रीजनिंग चेक की जाएगी।

दुनिया की हलचल के बारे में आपको पता हो

  • इंटरव्यू में उम्मीदवार को नॉलेज का नहीं बल्कि उसकी अवेयरनेस का टेस्ट होता है। नॉलेज पहले की परीक्षाओं में हो चुकी होती है। देश दुनिया की हलचल से आपका रूबरू होना जरूरी होता है। इसके अलावा आप जो भी बात कहें उसके हर पहलू से आपको अवगत होना चाहिए।
  • अगर इंटरव्यू बोर्ड में से कोई सदस्य आपके जवाब पर काउंटर कर दें तो आप क्या कहेंगे। हर पहलू के बारे में सोचना चाहिए। हर विषय को गंभीरता से लेने और समझने की जरूरत होती है।
  • कॉन्फिडेंस, नॉर्मल और नेचुरल होना चाहिए।
  • इंटरव्यू में आपके अंदर से एक ईमानदार आदमी की झलक दिखनी चाहिए। थोड़ी बहुत इंग्लिश आनी चाहिए।
  • उन्होंने कहा कि ऐसा कहना गलत है कि यूपीएससी का सीएसएटी पैटर्न आर्ट्स वालों के खिलाफ है या साइंस वालों की मदद करता है। क्वेश्चन पेपर के स्टैंडर्ड को देखना जरूरी है। आमतौर पर सीएसएटी जैसे प्रश्न बैंक समेत अन्य बहुत सी सरकारी नौकरी की प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। ये लॉजिकल क्वेश्चन होते हैं। आईएएस परीक्षा में बैठ रहे हैं तो आपका कॉम्प्रिहेंशन टेस्ट किया जा रहा है। कॉम्प्रिहेंशन तो आर्ट्स व साइंस दोनों स्ट्रीम के स्टूडेंट्स कर सकते हैं। रीजनिंग के सवाल सभी को आने चाहिए। ये मुश्किल क्वेश्चन नहीं होते। बहुत सारी कमिटीज ने गहन विचार-विमर्श के बाद सीसैट की सिफारिश की थी। आईएएस बनना चाह रहे युवाओं को थोड़ी बहुत इंग्लिश आनी चाहिए। ग्लोबलाइजेशन के दौर में इंग्लिश का आना जरूरी है।


हमें यंग और एनर्जी से भरपूर ऑफिसर चाहिए

  • 1974 बैच झारखंड कैडर के आईएएस ऑफिसर दीपक गुप्ता का कहना है कि अधिकतर स्टेक होल्डर्स मानते हैं कि सिविल सेवा परीक्षा की अधिकतम आयु सीमा कम होनी चाहिए। हमें सिविल सेवाओं में यंग लोग चाहिए। चाहे वह किसी भी वर्ग या तबके के हों। हम क्यों नहीं चाहेंगे तो कि एससी, एसटी, ओबीसी वर्ग के यंग लोग सिविल सेवा में आएं। हर कैटेगरी के हमें यंग ऑफिसर चाहिए। हम चाहते हैं कि टाइम से वह प्रमोट होते हुए हर टॉप पॉजिशन तक पहुंचे। हमें फ्रेश, एनर्जी ये भरपूर युवा सिविल सेवा अधिकारी चाहिए। युवा ही सबसे ज्यादा चेंज एजेंट्स होते हैं।


सिविल सेवाओं में भी चुनौती

  • एक कोचिंग संस्थान के छात्रों से बातचीत करते हुए दीपक गुप्ता ने कहा कि अभ्यर्थियों को सिविल सेवाओं की चुनौतियों के लिए तैयार रहना चाहिए। ऐसा नहीं है कि देश की सर्वोच्च सिविल सेवा में चुनौतियां नहीं हैं। और चुनौतियों के बगैर जीवन भी क्या है! ये बात उन्होंने एक छात्र के प्रश्न के जवाब में कही। छात्र ने पूछा था कि बहुत से सिविल अधिकारियों को बार-बार तबादलों का सामना करना पड़ता है। इससे यूपीएससी की तैयारी कर रहे युवा हतोत्साहित होते हैं।

दीपक गुप्ता ने सेंट स्टीफन कॉलेज से मास्टर और जेएनयू से इंटरनेशनल रिलेशन में एमफिल किया हुआ है। 2011 में मिनिस्ट्री ऑफ रिन्यूवल एनर्जी में सेक्रेटरी पद से रिटायर होने के बाद वह कंसल्टेंट के तौर पर वर्ल्ड बैंक व UNIDO में भी रहे। वर्तमान में वह NSEF के महानिदेशक हैं।
हर वर्ष यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा तीन चरणों- प्रारंभिक, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में आयोजित की जाती है। इसके जरिए भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) सहित अन्य सेवाओं के लिए चयन किया जाता है।

-मोहित डागर की फेसबुक वॉल से साभार

Tuesday, June 9, 2020

आखिर क्यों करते हैं हम ऐसा?

-शुभम कुमार यश

confused in study, motivation story
(1) आखिर क्यों हम एक किताब 10 बार पढऩे की बजाय 10 तरह की किताबें पढऩा ज्यादा पसंद करते हैं।   एसएससी की तैयारी करने वाला छात्र अपने घर को लाइब्रेरी बनाकर बैठ जाता है ... सफलता बहुत सी किताबें पढऩे से नहीं बल्कि एक किताब को बहुत बार पढऩे से मिलती है।

(2) आखिर क्यों हम सीखने के समय में सीखने की बजाय सिखाना ज्यादा पसंद करते हैं। "हर रोज प्रतियोगी छात्र फरमान जारी करते हैं ...मैं #SSC_CGL की तैयारी के लिए ग्रुप बना रहा हूँ ... अपना no कमेंट बॉक्स में लिखिए ....." मेरे प्यारे भाई इस समय आपका एक एक सेकंड अमूल्य है ...कृपया पहले आप बन जाइये फिर और ज्यादा ऊर्जा और संसाधनों के साथ आप सबकी मदद कर पाएंगे।

(3) आखिर क्यों हम एक ही मार्गदर्शक पर यकीन नहीं रख पाते? हर रोज नए मार्गदर्शक की खोज में लगे रहते हैं ... सभी का अपना एक अलग तरीका होता है ... और उस चक्कर में आपकी अपनी तैयारी कभी पटरी में आ ही नहीं पाती ...हमेशा नयी शुरुआत करते रह जाते हैं !

(4) आखिर क्यों हमारे लिए अपनी जीत से ज्यादा दूसरे की हार मायने रखती है। "मैं तो कम से कम मुख्य परीक्षा तक पहुँच गया था उसको देखो वो तो प्रारंभिक परीक्षा भी नहीं पास कर पाया" ...और इसके साथ ही आप खुद को तसल्ली दे देते हो ...पर आपको कौन सा मुख्य परीक्षा पास करने का प्रमाण पत्र मिल गया ...ये भी बता दीजिये।

(5) आखिर क्यों हम सब सपने तो हमेशा बड़े देखते हैं लेकिन मात्र 10 प्रतिशत लोग ही उसकी कीमत चुकाने को तैयार होते हैं। बनना तो #Examiner, #Income_Tax_Inspector ही है पर 8 घंटे सोना नहीं छोड़ सकते ....और न ही 8 घंटे पढऩे में मन लग सकता ...तो भाई इंतजार करो शायद कोई बाबा किसी घूंटी का आविष्कार कर दे ...जो आपको सीधे मसूरी भेज दे )

(6) आखिर क्यों हम हर काम या नयी शुरुआत को कल पर टाल देते हैं ....और वो भी इतने यकीन के साथ जैसे हम कल का दिन देखने ही वाले हों !

(7) आखिर क्यों हम अपनी नाकामी का सेहरा हमेशा दूसरों के सर पर मढ़ देते हैं ..... असल में उनका हम कुछ नहीं बिगाड़ते ... अपने साथ ही सबसे बड़ा धोखा करते हैं!

(8) आखिर क्यों अपने ही मष्तिष्क पर हमारा नियंत्रण नहीं रह पाता....हम जानते हैं कि इस समय ये चीजें हमारे लिए बुरी हैं पर फिर भी हम कर डालते हैं ...और बाद में खुद को समझा देते हैं कि आगे से ऐसा नहीं होगा और फिर अगली बार होता है ...और फिर से आप यही लाइन दोहरा लेते हैं!

(9) आखिर क्यों हम अपने समय की कीमत नहीं समझ पाते और उसे यूँ बर्बाद करते हैं जैसे ऊपर वाले के साथ 500 साल का एग्रीमेंट करके आये हो .....जरा सोच लो अगर अगले ही पल आपके सामने मौत खड़ी हो ..तो क्या छोड़ कर जा रहे हो यहाँ जिससे लोग आपको याद रखें। "कुछ नहीं किया अब तक मेरे भाई ..मत सोच इतना"?

(10) आखिर क्यों हम हम हर दिन कुछ नया पढ़ते हैं ..."जैसे फेसबुक में में ही कोई नया मोटिवेशनल थॉट ही लेलो" .......और उसके नीचे "wavvv" का कमेंट भी कर देते हैं .... जरा सोचो कि कितनी बार अपने ऐसा किया? ...शायद सैकड़ों बार .....पर उसमें से कितनी लाइन्स को खुद की जिंदगी पर लागू किया ..? अगर एक लाइन भी लागू कर देते मेरे भाई तो आपकी जिंदगी उसी वक्त बदल जाती ....!!
शुभकामनाएं!

शुभम कुमार यश की फेसबुक वॉल से साभार

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Sunday, June 7, 2020

मैं यूपीएससी सिविल सेवा की परीक्षा की तैयारी कहाँ से शुरू करूं?

-शुभम कुमार यश
 
जो छात्र अभी ग्रेजुएशन में हैं या कहीं बाहर जाकर तैयारी नहीं कर पा रहे हैं और आईएएस की तैयारी शुरू करना चाहते हैं, उनके मन में ढेरों सवाल होते हैं?
  • आईएएस के लिए क्या-क्या पढऩा पड़ेगा?
  • कैसे पढ़ना पड़ेगा?
  • कौन-कौन सी बुक्स पढ़नी पड़ेंगी?
  • न्यूज पेपर और मैगजीन जरुरी हैं क्या?
  • अगर हाँ तो कौन सी?

उनके लिए इस पोस्ट को मैंने तैयार किया है...आशा है कि आपकी कुछ मदद करेगी :
मैं आपको कुछ टिप्स दे रहा हूँ जो आपको आईएएस की तैयारी में मदद करेंगी!
ias ki taiyari kaise suru kare, ias kaise bane

1. आईएएस की तैयारी की शुरुआत एनसीईआरटी की बुक्स से कीजिये। उनका कोई भी विकल्प नहीं है। एनसीईआरटी आपका 'बेस' क्लियर करने के काम में आती हैं। ऐसे छात्र जिनकी पृष्ठभूमि कला क्षेत्र से न रही हो। उनके लिए ये सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। एनसीईआरटी को खत्म करने का टारगेट बनाइये और दो माह में इसे खत्म कर दीजिये। इस दौरान आपको नोट्स नहीं बनाने हैं। सिर्फ महत्वपूर्ण तथ्य जो आपको आगे सहायता प्रदान करेंगे, उन्हें हाईलाइट करते हुए चलना है। कम से कम चार विषय जिसमें इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र आदि की 6 से 12 तक की तो खत्म ही कर लीजिये।

2. जब एनसीईआरटी खत्म हो जाये फिर आपको हर विषय की मुख्य किताब लेनी होगी। 'हर विषय के विशेषज्ञों की अलग-अलग किताबें हैं।' अब एक-एक विषय को लीजिये और उसकी एनसीईआरटी भी लीजिये। फिर उसे पढ़कर नोट्स बनाते जाइये जिसमें एनसीईआरटी की भी मदद लीजिए। जब एक विषय पूरा हो जाये फिर दूसरा ले लीजिये और उसी दौरान पहले का रिवीजन करते जाइये। फिर तीसरी, चौथी आदि इसी तरह प्रक्रिया आगे बढाइये।

3. आईएएस की तैयारी के दौरान सबसे महत्वपूर्ण हैं समाचार पत्र। आखिर आपको राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों का पता होना चाहिए। अब सवाल ये आता है कि कौन सा समाचार पत्र? कई लोगों ने मुझसे कहा था कि सर हमारे यहाँ 'द हिन्दू' नहीं आता। ऐसे भी बहुत लोग हैं जिन्हें अंग्रेजी में समस्या होती है। तो देखिये समाचार पत्र जरुरी नहीं कि 'द हिन्दू' ही हो। अगर आपको नहीं मिल पा रहा या नहीं समझ आ रहा तो आप कोई भी एक राष्ट्रीय पेपर फॉलो कर सकते हो। समाचार पत्र में मुख्य पृष्ठ पढऩे के बाद, देश-विदेश, अर्थव्यवस्था वाला पेज। इसके बाद सीधे सम्पादकीय पृष्ठ पर जाइये, खेल और बाकी सरसरी निगाह से देख लीजिये।

4. अब बारी आती है मासिक पत्रिका की। कुछ लोग प्रतियोगिता दर्पण कहते हैं। पर यहाँ पर मैं एक चीज कहना चाहूंगा कि अगर आप पीसीएस की तैयारी कर रहे हो तो प्रतियोगिता दर्पण ठीक है पर आईएएस की तैयारी के लिए सिविल सर्विस क्रॉनिकल, सिविल सर्विसेज टाइम्स या फ्रन्टलाइन इनमे से किसी एक पत्रिका को नियमित फॉलो कीजिये। जब तक आप सफल नहीं हो जाते तब तक। किसी भी माह की पत्रिका छूटने न पाये!!
5. सिविल सर्विसेज प्रारंभिक परीक्षा हो या मुख्य परीक्षा इसमें अनसॉल्वड पेपर्स बहुत अहमियत रखते हैं। मैं कहता हूँ कि आप सब तैयारी शुरू करने से पहले ही अनसॉल्वड पेपर्स देख लें। इससे आपको आईएएस परीक्षा के प्रश्नों के स्वरुप का पता चलता है। क्योकि इस परीक्षा में प्रश्नो का स्वरुप अन्य सभी बैंक, एसएससी आदि से भिन्न होता है। इसलिए पेपर्स ले लेकर प्रश्नो के स्वरुप को ठीक तरह से समझ लें।

6. एक सबसे महत्वपूर्ण काम जो आपको पूरी तैयारी के दौरान करना है कि आप रोज किन्हीं 2 प्रश्नों को लेकर आंसर राइटिंग की प्रैक्टिस कीजिये। वो प्रश्न किसी भी चीज से सम्बंधित हो सकते हैं। विषय से या समसामयिक मुद्दे से,  क्योंकि आईएएस मुख्य परीक्षा में सफलता का एक मात्र आधार आपका उत्तर लेखन ही है।

दोस्तों आईएएस में सफलता का एक ही फॉर्मूला है 'नियमित और विश्लेषणात्मक अध्ययन'। यहाँ सिर्फ पढऩा नहीं बल्कि आपको पता होना चाहिए कि किस तरह पढऩा है। अगर आप सही दिशा में अध्ययन कर रहे हैं तो 10 माह में भी सफल हो जायेंगे और अगर आप दिशाविहीन तैयारी कर रहे हैं तो 10 वर्ष भी आप परिश्रम कर लें कुछ नहीं हासिल होने वाला।

शुभम कुमार यश की फेसबुक वॉल से साभार

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Thursday, June 4, 2020

IAS Aspirant : चरैवेति - चरैवेति

इस परीक्षा (आईएएस) के बारे में शुरू में ही जान लें कि "ये राह नहीं आसां बस इतना समझ लीजिये। इक आग का दरिया है और डूब कर जाना है।" यदि कलेक्टर बनने का ख्वाब देख रहे हो तो एक बार फिर सोच लो। कहीं ऐसा न हो कि आधे रास्ते पहुंच कर पछताना पड़े कि यार कहां आकर फंस गए?

मेहनत करके रात-दिन एक कर दिया। सारे सब्जेक्ट रट लिए हैं। सैकड़ों बार तो इन किताबों और पत्रिकाओं को पढ़ चुके हैं। अच्छी कोचिंग भी कर ली है, खूब अभ्यास भी करते हैं। अब और क्या करें सफलता पाने के लिए। आपके मन में बार-बार इस तरह के निराशाजनक विचार पैदा होंगे। बार-बार मन में विचार उठेंगे कि बड़े-बड़े धुरंधरों का सेलेक्शन जब नहीं हो रहा है  तो फिर हम किस खेत की मूली हैं। आपको इस तरह के निराशाजनक विचारों से लगातार खुद को मुक्त करते रहना होगा।

खुद को साबित करने के लिए हर क्षण आत्मविश्वास धैर्य, दृढ़ता और समर्पण की डोर कस कर पकड़े रहना होगा। 'एकला चलो रे' तथा 'चरैवेति - चरैवेति' का सूत्र ध्यान  रखना होगा। अपने कान में खुद के द्वारा  मंत्र फूंकते रहना होगा कि मै कर लूँगा। हां मैं कर लूँगा। “Yes, If I Can Dream It I Can do It.” हां मैं करके दम लूंगा। यह मेरा संकल्प हैं। कलेक्टर मुझे बनना है किसी और को नहीं। नहीं... मैं खुद को एक मजाक बनने नहीं दूंगा। हां मैं अपने लिए एक स्थान बना कर दम लूंगा। मैं इसके लिए तन-मन-धन सब एक कर दूंगा। मैं खुद को भीड़ में नहीं खोने दूंगा। यही मेरा इश्क है। यही मेरा जुनून है। मैं ख्वाब को हकीकत में बदल कर ही रूकूंगा। यह मैं और मेरा खुदा जानता है कि मैंने ईमानदारी से मेहनत की है। मैंने अपनी दिशा नहीं छोड़ी। यदि किया गया परिश्रम व्यर्थ नहीं जाता तो मुझे मेरी मंजिल जरूर मिलेगी।
भगवान के घर देर हो सकती है लेकिन अंधेर नहीं है। इसी तरह खुद को बुलंद, बेबाक और बहादुर बनाना होगा। इस बात को सदैव ध्यान रखना -
 
"खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले।
खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है।"

जब सच्चे मन से पढ़ाई करोगे तो वह एक तपस्या बन जाती है। उसमें खुदाई अंदाज पैदा हो जाता है। ईश्वर खुद तुम्हारी मदद के लिए हाजिर हो जाता है। लेकिन बहुत कम अभ्यर्थी खुद को इस लेवल तक पहुंचा पाते हैं। कहना आसान है करना मुश्किल। आप खुद सोचो अब तक आपने जो भी सोचा उसमें से कितना कर पाए? इसी से आगे का अंदाजा लगा लो।

-आईएएस विद्यार्थी मित्र से साभार

जीवन एक संघर्ष

गिद्ध की प्रजाति का एक पक्षी है, नाम भूल रहा हूं। वह अंडे देने के लिए किसी ऊंचे पर्वत की चोटी पर चला जाता है। जोड़ा वहीं अंडे देता है, मादा ...